आंखे ये क्या आपकी है ?/हेमंत सिंह

आसमान में ढलती ये सूरज सी आंखे ||2|| 

क्या आपकी है ?


आफ़ताब को घेरे जैसे बादल , वैसी पलके 

क्या आपकी है ? 


मुझसे कुछ तो है ये कह रही || 2 || 

ये "अंदाज – ए – बयां " कुछ ओर ही है,


किसी बहते झरने की आवाज़ सी बोलती आंखे 

क्या आपकी है ? 


हर बार मुझे है रोक ही लेती  || 2 || 

ठंडक इस नज़र में कुछ ओर ही है ,


आखिर है क्या ये बात निराली , अलग सी आंखे 

क्या आपकी है ? 


अपनी गहराई तक महदूद रखती  || 2 || 

क़सूरवार आंखे आपकी है ,


दुआ है  ,न हो अक्ष – ज़र कभी  || 2 || 

मुस्कुराती सी आंखे सिर्फ आपकी है !!

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