पत्रकारिता में समय बहुत कीमती होता है। घटनाएँ अचानक घटती हैं और रिपोर्टर को तुरंत जानकारी दर्ज करनी पड़ती है। ऐसे में दिमाग पर निर्भर रहना हमेशा सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि इंसान कभी-कभी तथ्य या बयान भूल सकता है। इसलिए हर पत्रकार के लिए नोट्स बनाने और रिकॉर्डिंग करने की तकनीकें बेहद जरूरी होती हैं। यह न केवल खबर की सटीकता बनाए रखती हैं, बल्कि रिपोर्टिंग को विश्वसनीय भी बनाती हैं।
नोट्स बनाने की कला
नोट्स पत्रकार के सबसे भरोसेमंद साथी होते हैं। रिपोर्टिंग करते समय लंबी-लंबी बातें लिखना संभव नहीं होता, इसलिए संक्षिप्त और स्पष्ट शब्दों में नोट्स बनाना जरूरी है। पत्रकार अक्सर छोटे वाक्य, संकेत या की-वर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए—किसी भाषण के दौरान पूरा भाषण लिखने की बजाय मुख्य शब्द, आँकड़े और वक्ता का नाम लिख लेना अधिक व्यावहारिक होता है। नोट्स हमेशा समय और स्थान के साथ लिखने चाहिए, ताकि बाद में जानकारी को जोड़ने में आसानी हो। इसके अलावा पत्रकार अपने नोट्स को बाद में साफ-सुथरे रूप में पुनर्लिखित करते हैं ताकि रिपोर्ट तैयार करते समय भ्रम न हो।
रिकॉर्डिंग तकनीकें
आज की डिजिटल पत्रकारिता में रिकॉर्डिंग तकनीकें बेहद कारगर हैं। मोबाइल फोन, टेप रिकॉर्डर या वॉइस रिकॉर्डिंग ऐप्स की मदद से साक्षात्कार और भाषण को सुरक्षित किया जा सकता है। रिकॉर्डिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वक्ता के शब्द ज्यों के त्यों दर्ज हो जाते हैं और बाद में रिपोर्टर उन्हें सुनकर सटीक उद्धरण इस्तेमाल कर सकता है। वीडियो रिकॉर्डिंग भी घटनाओं का प्रमाण बनती है और खबर की विश्वसनीयता को बढ़ाती है। हालांकि, रिकॉर्डिंग करते समय पत्रकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपकरण सही काम कर रहा है और बैटरी या स्टोरेज की कमी न हो।
नोट्स और रिकॉर्डिंग का संतुलन
एक कुशल पत्रकार केवल रिकॉर्डिंग पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि वह नोट्स भी साथ-साथ बनाता है। क्योंकि कई बार तकनीकी समस्या के कारण रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रह पाती, ऐसे में नोट्स मददगार साबित होते हैं। इसी तरह केवल नोट्स पर निर्भर रहना भी पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि वक्ता के शब्दों को हूबहू लिख पाना मुश्किल है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि रिपोर्टर नोट्स और रिकॉर्डिंग दोनों का संतुलित उपयोग करे।
निष्कर्ष
नोट्स और रिकॉर्डिंग तकनीक पत्रकारिता की सटीकता और विश्वसनीयता की गारंटी हैं। ये न केवल तथ्यों को सही रूप में सुरक्षित करती हैं, बल्कि रिपोर्टर को बाद में खबर लिखते समय आत्मविश्वास भी देती हैं। एक सफल रिपोर्टर वही है जो मौके पर तेजी से नोट्स बना सके, रिकॉर्डिंग का सही इस्तेमाल कर सके और दोनों को मिलाकर संतुलित एवं प्रमाणिक रिपोर्ट तैयार करे।
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