'अनुपमा (सबकी सहेली)' ने इस बार अपने पाठकों के लिए एक बेहद खास और प्रेरणादायक सौगात पेश की है। पत्रिका की संस्थापिका सुशी सक्सेना, संपादक अनुपमा व बुद्धि प्रकाश सेन और सलाहकर्ता डौली झा के अनुसार, इसमें शामिल आत्मकथाएँ पाठकों के जीवन के प्रति नजरिए को बदलने की क्षमता रखती हैं।
अक्सर हम चमकती हुई सफलता को तो देखते हैं, लेकिन उसके पीछे छिपे काँटों भरे रास्तों से अनजान रहते हैं।
इस विशेषांक का मुख्य उद्देश्य उन अनकही कहानियों को सामने लाना है जो बताती हैं कि फर्श से अर्श तक का सफर कैसा होता है। अनुपमा (सबकी सहेली) पत्रिका के इस अंक में देश विदेश की दिग्गज हस्तियों ने स्वयं अपने जीवन के उतार-चढ़ाव साझा किए हैं। उनके जीवन के वो पहलू जो अब तक दुनिया से ओझल थे। गंभीर आत्मकथाओं के साथ-साथ पाठकों के समय को खुशनुमा बनाने के लिए मनोरंजन की भी विशेष सामग्री शामिल की गई है।
'अनुपमा' के इस अंक को लेकर पाठकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। पत्रिका का दावा है कि यह अंक न केवल जानकारी देगा, बल्कि मुश्किल समय में हार न मानने का हौसला भी देगा। यदि आप जानना चाहते हैं कि सफलता की असली कीमत क्या होती है, तो यह विशेषांक आपके लिए एक अनिवार्य संग्रह है।

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