जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श - डॉ शैलेश शुक्ला
'वीणा की वाणी’ सम्मेलन: साहित्यिक पत्रिकाओं की वर्तमान चुनौतियों, तकनीकी परिवर्तनों और भविष्य की दिशा पर हुआ गंभीर मंथन — जसराज बिश्नोई
साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिस्पर्धा से निकालकर एक परिवार में रूपांतरित करने का प्रयास है यह सम्मेलन — डॉ. विकास दवे