19 अप्रैल 2026 को “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” के तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भारत सहित कई देशों के साहित्यकारों ने सहभागिता कर साहित्यिक एकता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में रविवार, 19 अप्रैल 2026 को सायं 4 बजे से गूगल मीट के माध्यम से एक ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष श्री देवेंद्र नाथ शुक्ल ने की, जबकि संचालन संस्थापक सचिव डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद द्वा…
कोटा/बारां, 10 अप्रैल 2026 — राजस्थान के युवा साहित्यकार नवीन कुमार लववंशी ‘नवीन राजस्थानी’ को साहित्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए “संगम अकादमी सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान ऑनलाइन आयोजित एक गरिमामयी समारोह में प्रदान किया गया। कोटा/बारां /बारां जिले के काकोनी गणेशपुरा निवासी नवीन कुमार लववंशी ने कम उम्र में ही साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। 11 जून 2007 को जन्मे नवीन वर्तमान में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं और लेखन के प्रति निरंतर समर्पित हैं। उनके पिता दुर्गा लाल लववंशी और माता मंजू बाई के मार्गदर्शन ने उनके साहि…
लखनऊ / बाबू शोभनाथ मेमोरियल ट्रस्ट लखनऊ इकाई की ऑनलाइन काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। बाबू शोभनाथ मेमोरियल ट्रस्ट की संस्थापिका सत्यभामा ने पधारे सभी साहित्यकारों का स्वागत करते हुए मंच गठित किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राम बहाल ने की। विशिष्ट अतिथि अयोध्या प्रसाद द्विवेदी एवं प्रिया अभिषेक रही।कार्य क्रम का आरंभ सुनील कुमार खुराना द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ। कुशल संचालन मधुलिका स्वरूप ने किया। काव्य गोष्ठी में रामबहाल सिंह वाराणसी,डॉ खुशबू शांतिलेख लखनऊ, मधुलिका स्वरूप,सत्यभामा, सुनील कुमार खुराना नकुड,डॉ गुर्जर …
मालवी भाषा में लेखन के लिए बदनावर विकास खंड से नवाचारी शिक्षक गोपाल कौशल को किया सम्मानित मध्यप्रदेश का पहला नवाचार नागदा (धार) कलेक्टर प्रियंक मिश्र की प्रेरणा तथा डाइट प्राचार्य मनोज कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत संचालित मिशन अंकुर के तहत कक्षा 1 एवं 2 की हिंदी भाषा सामग्री का स्थानीय लोकभाषाओं—मालवी, निमाड़ी और भीली में अनुवाद जिले के शिक्षकों द्वारा किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल का विमोचन डाइट धार में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक चौधरी, डाइट प्राचार्य म…
जयपुर मूल की वरिष्ठ कवयित्री सुखमिला अग्रवाल ‘भूमिजा’ को साहित्य और मानवता हित में उत्कृष्ट योगदान के लिए ग्लोबल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (यूएसए) द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। जयपुर, 6 अप्रैल। जयपुर की वरिष्ठ कवयित्री सुखमिला अग्रवाल ‘भूमिजा’ को उनके साहित्यिक योगदान एवं समाजसेवी कार्यों के लिए ग्लोबल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (यूएसए) द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान गुजरात के वलसाड़ स्थित हार्टफुलनेस मेडिटेशन एवं योगा सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। इस अवसर पर हार्टफुलनेस सेंटर के निदेश…
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को नागौर के रोहिणी स्थित बाबा साहब स्मारक में आयोजित समारोह में दिल्ली की लेखिका, कवयित्री व गायिका सोनिया सरीन ‘साहिबा’ को हिंदी साहित्य में योगदान हेतु सम्मानित किया जाएगा। सोनिया सरीन ‘साहिबा’ नागौर/दिल्ली। डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती के उपलक्ष्य में 14 अप्रैल को बाबा साहब स्मारक, रोहिणी (नागौर) में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन अखिल भारतीय कबीर मठ सद्गुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान, बड़ी खाटू तथा डॉ. अंबेडकर प्रतिमा अनावरण सेवा समिति, रोहिणी के संयुक्त तत्वावधान म…
लखनऊ के आचार्य पिंगल सभागार में 05 अप्रैल 2026 को शिवभार गुर्जर लखनवी साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित मासिक कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में देशभर से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। इस अवसर पर विभिन्न साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया। लखनऊ, 05 अप्रैल 2026 । आचार्य पिंगल सभागार, प्रभात नगर तेलीबाग में शिवभार गुर्जर लखनवी साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. एल.पी. गुर्जर ‘लखनवी’ द्वारा अतिथियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ ह…
आज का समय परिवर्तन का समय है। भाषा, साहित्य और अभिव्यक्ति के रूप लगातार बदल रहे हैं। ऐसे दौर में “हिंदीज़ा” एक नए साहित्यिक दृष्टिकोण के रूप में उभर सकता है—जहाँ पारंपरिक हिंदी की गहराई और आधुनिकता की सहजता का सुंदर संगम दिखाई देता है। हिंदीज़ा क्या है? “ हिंदीज़ा ” को हम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक विचारधारा मान सकते हैं। यह हिंदी की जड़ों से जुड़ी हुई, लेकिन नई पीढ़ी की भाषा शैली को अपनाने वाली अभिव्यक्ति है। इसमें हिंदी की शुद्धता के साथ-साथ उर्दू की नज़ाकत, अंग्रेज़ी के प्रयोग की सहजता और बोलचाल की जीवंतता समाहित होती है। हिंदीज़ा की विशेषताएँ…
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