आज का समय परिवर्तन का समय है। भाषा, साहित्य और अभिव्यक्ति के रूप लगातार बदल रहे हैं। ऐसे दौर में “हिंदीज़ा” एक नए साहित्यिक दृष्टिकोण के रूप में उभर सकता है—जहाँ पारंपरिक हिंदी की गहराई और आधुनिकता की सहजता का सुंदर संगम दिखाई देता है। हिंदीज़ा क्या है? “ हिंदीज़ा ” को हम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक विचारधारा मान सकते हैं। यह हिंदी की जड़ों से जुड़ी हुई, लेकिन नई पीढ़ी की भाषा शैली को अपनाने वाली अभिव्यक्ति है। इसमें हिंदी की शुद्धता के साथ-साथ उर्दू की नज़ाकत, अंग्रेज़ी के प्रयोग की सहजता और बोलचाल की जीवंतता समाहित होती है। हिंदीज़ा की विशेषताएँ…
इंदौर/ इंदौर साहित्य की ऐतिहासिक नगरी इंदौर में 'वीणा की वाणी' शीर्षक के अंतर्गत देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं पर केंद्रित दो दिवसीय गहन विमर्श का आयोजन मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित हुआ। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्य, पत्रकारिता और आधुनिक तकनीक के अंतर्संबंधों पर नई दृष्टि साझा की। 'वीणा की वाणी' विषय पर दो दिवसीय पत्र-पत्रिकाओं का विमर्श कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में…
इंदौर / समकालीन समय में जब सूचना, संचार और विचारों का प्रवाह अभूतपूर्व गति से हो रहा है, तब संपादकीय कर्म की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण, जटिल और जिम्मेदार बन गई है। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाएँ केवल रचनाओं के प्रकाशन का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि वे समाज की बौद्धिक चेतना, वैचारिक दिशा और सांस्कृतिक संवाद की आधारशिला के रूप में कार्य कर रही हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि संपादकों के सामने अनेक नई चुनौतियाँ उपस्थित हों—चाहे वे सामग्री की गुणवत्ता से जुड़ी हों, तकनीकी बदलावों से, आर्थिक संसाधनों की कमी से, या बदलती पाठकीय रुचियों से। इन चुनौति…
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