कोटा/बारां/बारां जिले के काकोनी गणेशपुरा निवासी नवीन कुमार लववंशी ने कम उम्र में ही साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। 11 जून 2007 को जन्मे नवीन वर्तमान में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं और लेखन के प्रति निरंतर समर्पित हैं। उनके पिता दुर्गा लाल लववंशी और माता मंजू बाई के मार्गदर्शन ने उनके साहित्यिक सफर को मजबूती दी है।
‘नवीन राजस्थानी’ की रचनाओं में समाज, भावनाओं और जीवन के विविध आयामों की गहरी झलक देखने को मिलती है। उनकी प्रमुख कृतियों में “माया”, “दो अक्षरों का एक शब्द पिता”, “बहन”, “करुण वेदना”, “हम लड़कों का जीवन”, “नवदुर्गा”, “जरूरी है क्या”, “पतंग” और “क्यों आई तू दिवाली” शामिल हैं।
अब तक वे 100 से अधिक कविताएं, 15 से अधिक कहानियां और 50 से अधिक लेख लिख चुके हैं। इसके अलावा उनका उपन्यास “एक आख़िरी मुलाकात” और कविता संग्रह “प्रेम ही तो था” अंतरराष्ट्रीय डिजिटल मंच पर प्रकाशित हो चुके हैं।
इससे पूर्व भी उन्हें “काव्य भारती सम्मान”, “मां भारती सेवा सम्मान 2025” और “कविता शिरोमणि सम्मान 2026” जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
संगम अकादमी सम्मान मिलने पर साहित्यिक जगत में खुशी की लहर है। यह सम्मान न केवल उनकी उपलब्धियों का प्रमाण है, बल्कि भविष्य में और उत्कृष्ट सृजन के लिए प्रेरणा भी है।
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