इंदौर/ इंदौर साहित्य की ऐतिहासिक नगरी इंदौर में 'वीणा की वाणी' शीर्षक के अंतर्गत देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं पर केंद्रित दो दिवसीय गहन विमर्श का आयोजन मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित हुआ। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्य, पत्रकारिता और आधुनिक तकनीक के अंतर्संबंधों पर नई दृष्टि साझा की। 'वीणा की वाणी' विषय पर दो दिवसीय पत्र-पत्रिकाओं का विमर्श कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में…
इंदौर / समकालीन समय में जब सूचना, संचार और विचारों का प्रवाह अभूतपूर्व गति से हो रहा है, तब संपादकीय कर्म की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण, जटिल और जिम्मेदार बन गई है। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाएँ केवल रचनाओं के प्रकाशन का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि वे समाज की बौद्धिक चेतना, वैचारिक दिशा और सांस्कृतिक संवाद की आधारशिला के रूप में कार्य कर रही हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि संपादकों के सामने अनेक नई चुनौतियाँ उपस्थित हों—चाहे वे सामग्री की गुणवत्ता से जुड़ी हों, तकनीकी बदलावों से, आर्थिक संसाधनों की कमी से, या बदलती पाठकीय रुचियों से। इन चुनौति…
इंदौर। 'वीणा की वाणी’ शीर्षक से आयोजित दो दिवसीय (30 व 31 मार्च)साहित्यिक सम्मेलन में देशभर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं पर व्यापक और गंभीर विमर्श हुआ। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता और तकनीक के बदलते संबंधों पर गहन चर्चा की गई। 'वीणा की वाणी' विषय पर दो दिवसीय पत्र-पत्रिकाओं का विमर्श उद्घाटन सत्र में निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार के रूप में जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने समरसता और सहयोग की भावना पर बल देते हुए…
Social Plugin