कार्यक्रम की शुरुआत शीला तिवारी द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। अध्यक्षता डॉ. आशा पुष्प ने की और मंच संचालन लव कुमार ने किया। इस काव्य पाठ सत्र में डॉ. नरेंद्र कुमार राय ने “त्राहि मां त्राहि माम्”, लव कुमार ने “बोझ लिए फिरता हूँ”, अमृता शर्मा ने “गर्मी की हठधर्मी”, कस्तूरी सिन्हा ने “ईंट-गारे का सिमटा घरौंदा” ,रिंकू गिरि ने “दर्शन तेरे” और कल्पना केसर ने "आंगन गाँव का" प्रस्तुति देकर वाह-वाही लूटी।
इस काव्य संध्या में विशेष आकर्षण रहीं कवियत्री पूर्णिमा सुमन, उन्होंने अपने गीत “प्रीत निभाने आई हूँ” के माध्यम से न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से उपस्थित सभी श्रोताओं का मन मोह लिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अर्चना मिश्रा, डॉ. आशा पुष्प, ताराचंद महतो, मनोज कुमार 'निशांत', क्रांति श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव, श्याम सुंदर केवट, सोनी कुमारी, आकाश खूंटी, अंकित उपाध्याय, पंकज दास, पद्मावती कोमल, शीला तिवारी, संजू कुमारी, सुप्रिया सरस तथा दुर्गेश कुमार ने विविध विषयों पर आधारित कविताओं के साथ सहभागिता की।
आयोजन को सफल बनाने में मानस चंद्र रजवार का विशेष योगदान रहा। अंत में अमृता शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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